अन्नप्राशन संस्कार

शिशु को पहली बार अन्न ग्रहण कराने की शुभ रस्म, पंडित जी की विधि के साथ। अवधि लगभग एक घंटा।

अन्नप्राशन संस्कार

अन्नप्राशन संस्कार शिशु को पहली बार अन्न खिलाने की शुभ रस्म है, जिसे मुँह जुठाई भी कहा जाता है।
अवधि: एक घंटा
दक्षिणा / सेवा शुल्क: ₹1,500 से शुरू (पंडित जी सहित)
पूजा सामग्री का खर्च अलग हो सकता है; बुकिंग के समय स्पष्ट बता दिया जाएगा।

यह पूजा क्या है
शिशु के दूध के साथ अन्न की ओर पहले कदम के रूप में यह संस्कार किया जाता है। पूजा के बाद शिशु को खीर या चावल का पहला कौर खिलाया जाता है। परिवार इस अवसर पर शिशु के स्वस्थ जीवन की कामना करता है।

कब और किसलिए की जाती है
- शिशु के लगभग छह या सात माह के होने पर, परंपरा अनुसार किया जाता है।
- शिशु के आहार में अन्न शुरू करने के शुभ उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
- माना जाता है कि पूजा के साथ शुरुआत करने से शिशु के स्वास्थ्य की मंगल कामना जुड़ती है।

पूजा की विधि (संक्षेप में)
1. संकल्प लेकर गणपति और कलश पूजन किया जाता है।
2. कुलदेवता और देवी-देवताओं का स्मरण किया जाता है।
3. शिशु का तिलक किया जाता है।
4. माता-पिता या बड़े चाँदी की चम्मच से खीर का पहला कौर खिलाते हैं।
5. बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है।
6. आरती और प्रसाद के साथ समापन होता है। परंपरा के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है।

आम तौर पर लगने वाली सामग्री
- चावल की खीर
- चाँदी की कटोरी और चम्मच
- रोली, मौली और अक्षत
- कलश और आम के पत्ते
- पुष्प
- फल और मिठाई
- शिशु के लिए नए वस्त्र
पूरी सामग्री सूची पंडित जी से पूछकर तय की जाएगी।

शुभ तिथि / मुहूर्त
शिशु की उम्र और पंचांग देखकर शुभ तिथि पंडित जी के साथ तय की जाती है।

बुकिंग कैसे करें
1. "फॉर्म भरें" पर अपनी पूजा, तिथि और स्थान बताएँ, या WhatsApp पर संपर्क करें।
2. हमारी टीम पंडित जी, समय और दक्षिणा की जानकारी देगी।
3. पुष्टि के बाद आपकी बुकिंग पक्की होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्र: क्या शिशु को खीर ही खिलाई जाती है?
उ: आम तौर पर खीर खिलाई जाती है; शिशु के लिए क्या उचित है, यह अपने बाल चिकित्सक से पूछ लें।

प्र: क्या यह संस्कार घर पर हो सकता है?
उ: जी हाँ, घर पर आसानी से कराया जा सकता है।

संपर्क: WhatsApp +91 8932026569 | info@yogsanskriti.co.in

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