गोद भराई संस्कार
गर्भवती महिला के मंगल की प्रार्थना में परिवार के साथ की जाने वाली पारंपरिक गोद भराई रस्म।

गोद भराई गर्भावस्था के दौरान भावी माँ के सम्मान और मंगल की कामना में की जाने वाली पारंपरिक रस्म है।
अवधि: 1 घंटा
दक्षिणा / सेवा शुल्क: ₹1,500 से शुरू (पंडित जी सहित)
पूजा सामग्री का खर्च अलग हो सकता है; बुकिंग के समय स्पष्ट बता दिया जाएगा।
यह पूजा क्या है
इसमें गर्भवती महिला को तिलक कर उसकी गोद में फल, मेवा और नारियल रखे जाते हैं।
कब और किसलिए की जाती है
- परंपरा में प्रायः गर्भावस्था के सातवें माह के आसपास यह रस्म की जाती है।
- माना जाता है कि यह माँ और शिशु के मंगल की शुभकामनाओं का सुंदर अवसर है।
- परिवार और रिश्तेदारों के साथ खुशी बाँटने का यह उत्सव है।
पूजा की विधि (संक्षेप में)
1. संकल्प और गणपति पूजन।
2. कलश पूजन और भावी माँ का तिलक व आरती।
3. गोद में फल, मेवा, नारियल और मिठाई रखना।
4. बड़ों का आशीर्वाद और मंगल गान। परंपरा के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है।
5. प्रसाद वितरण।
आम तौर पर लगने वाली सामग्री
- चौकी और आसन
- कलश
- रोली, हल्दी, अक्षत
- नारियल
- फल और सूखे मेवे
पूरी सामग्री सूची पंडित जी से पूछकर तय की जाएगी।
शुभ तिथि / मुहूर्त
मुहूर्त परिवार की सुविधा और माँ के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर पंडित जी के साथ तय किया जाएगा।
बुकिंग कैसे करें
1. "फॉर्म भरें" पर अपनी पूजा, तिथि और स्थान बताएँ, या WhatsApp पर संपर्क करें।
2. हमारी टीम पंडित जी, समय और दक्षिणा की जानकारी देगी।
3. पुष्टि के बाद आपकी बुकिंग पक्की होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र: क्या रस्म घर पर हो सकती है?
उ: हाँ, घर पर माँ की सुविधा के अनुसार आसानी से की जा सकती है।
प्र: कितने मेहमान शामिल हो सकते हैं?
उ: परिवार और मित्र शामिल हो सकते हैं।
संपर्क: WhatsApp +91 8932026569 | info@yogsanskriti.co.in