कन्या पूजा
नवरात्रि में छोटी कन्याओं के पूजन, भोजन और सम्मान की श्रद्धापूर्ण रस्म। पंडित जी के मार्गदर्शन में लगभग एक घंटे की सरल पूजा।

कन्या पूजा नवरात्रि में छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनके पूजन और सम्मान की रस्म है।
अवधि: एक घंटा
दक्षिणा / सेवा शुल्क: ₹1,000 से शुरू (पंडित जी सहित)
पूजा सामग्री का खर्च अलग हो सकता है; बुकिंग के समय स्पष्ट बता दिया जाएगा।
यह पूजा क्या है
इस पूजा में कन्याओं के पैर धोकर उन्हें आसन पर बिठाया जाता है, तिलक लगाया जाता है और श्रद्धा से भोजन कराया जाता है। यह नारी शक्ति के सम्मान की सुंदर परंपरा है। इसे प्रायः नवरात्रि के व्रत के समापन के साथ जोड़ा जाता है।
कब और किसलिए की जाती है
- चैत्र और शारदीय नवरात्रि की अष्टमी या नवमी तिथि पर की जाती है।
- नवरात्रि व्रत पूरा करने के बाद देवी माँ के प्रति आभार प्रकट करने के लिए की जाती है।
- माना जाता है कि कन्याओं का आदर करने से माँ दुर्गा प्रसन्न होती हैं।
पूजा की विधि (संक्षेप में)
1. कन्याओं का स्वागत कर उन्हें स्वच्छ आसन पर बिठाया जाता है।
2. श्रद्धा से उनके पैर धोए जाते हैं।
3. रोली-अक्षत से तिलक कर चुनरी या मौली अर्पित की जाती है।
4. हलवा, पूरी और चने का भोजन कराया जाता है।
5. उपहार और दक्षिणा देकर चरण स्पर्श व आशीर्वाद लिया जाता है।
6. माँ दुर्गा की आरती के साथ समापन होता है। परंपरा के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है।
आम तौर पर लगने वाली सामग्री
- रोली, अक्षत और मौली
- लाल चुनरी
- हलवा, पूरी और काले चने
- फल और मिठाई
- उपहार और दक्षिणा
- पुष्प
- धूप, दीप और आरती की थाली
पूरी सामग्री सूची पंडित जी से पूछकर तय की जाएगी।
शुभ तिथि / मुहूर्त
चैत्र या शारदीय नवरात्रि की अष्टमी-नवमी प्रचलित है; सही समय पंडित जी के साथ तय किया जाता है।
बुकिंग कैसे करें
1. "फॉर्म भरें" पर अपनी पूजा, तिथि और स्थान बताएँ, या WhatsApp पर संपर्क करें।
2. हमारी टीम पंडित जी, समय और दक्षिणा की जानकारी देगी।
3. पुष्टि के बाद आपकी बुकिंग पक्की होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र: कितनी कन्याओं को बुलाना चाहिए?
उ: परिवार की परंपरा के अनुसार प्रायः नौ कन्याएँ बुलाई जाती हैं; इसमें पंडित जी से सलाह ली जा सकती है।
प्र: क्या यह पूजा घर पर हो सकती है?
उ: जी हाँ, यह पूजा आम तौर पर घर पर ही की जाती है।
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