नामकरण संस्कार
नवजात शिशु के नामकरण की शुभ वैदिक विधि, पंडित जी के मार्गदर्शन में। अवधि लगभग एक घंटा।

नामकरण संस्कार नवजात शिशु को पहली बार विधि-विधान से नाम देने का संस्कार है।
अवधि: एक घंटा
दक्षिणा / सेवा शुल्क: ₹2,000 से शुरू (पंडित जी सहित)
पूजा सामग्री का खर्च अलग हो सकता है; बुकिंग के समय स्पष्ट बता दिया जाएगा।
यह पूजा क्या है
इस संस्कार में पूजा के साथ शिशु के जन्म नक्षत्र आदि के आधार पर नाम चुना जाता है। फिर परिवार के बड़े शिशु को उसका नाम सुनाते हैं। यह शिशु के जीवन की पहली सामाजिक पहचान का शुभ उत्सव है।
कब और किसलिए की जाती है
- शिशु के जन्म के बाद, प्रायः ग्यारहवें या बारहवें दिन, परंपरा अनुसार किया जाता है।
- परिवार में नए सदस्य के स्वागत के लिए रिश्तेदारों को बुलाकर किया जाता है।
- माना जाता है कि शुभ नाम के साथ शिशु के लिए मंगल कामना की जाती है।
पूजा की विधि (संक्षेप में)
1. संकल्प लेकर गणपति और कलश पूजन किया जाता है।
2. कुलदेवता और ग्रहों का स्मरण किया जाता है।
3. जन्म नक्षत्र आदि के आधार पर पंडित जी नाम का अक्षर बताते हैं।
4. शिशु का तिलक कर कान में नाम सुनाया जाता है।
5. बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है।
6. आरती और प्रसाद के साथ समापन होता है। परंपरा के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है।
आम तौर पर लगने वाली सामग्री
- कलश, आम के पत्ते और नारियल
- रोली, मौली और अक्षत
- शिशु के लिए नए वस्त्र
- पुष्प
- मिठाई और फल
- शिशु की जन्म तिथि, समय और स्थान की जानकारी
- धूप, दीप और कपूर
पूरी सामग्री सूची पंडित जी से पूछकर तय की जाएगी।
शुभ तिथि / मुहूर्त
नामकरण की तिथि जन्म के दिन और पंचांग देखकर पंडित जी के साथ तय की जाती है।
बुकिंग कैसे करें
1. "फॉर्म भरें" पर अपनी पूजा, तिथि और स्थान बताएँ, या WhatsApp पर संपर्क करें।
2. हमारी टीम पंडित जी, समय और दक्षिणा की जानकारी देगी।
3. पुष्टि के बाद आपकी बुकिंग पक्की होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र: नाम चुनने के लिए क्या जानकारी चाहिए?
उ: शिशु की जन्म तिथि, समय और स्थान बताने से पंडित जी नाम का अक्षर सुझा सकते हैं।
प्र: क्या रिश्तेदार शामिल हो सकते हैं?
उ: जी हाँ, परिवार और रिश्तेदार शिशु को आशीर्वाद देने के लिए शामिल हो सकते हैं।
संपर्क: WhatsApp +91 8932026569 | info@yogsanskriti.co.in