सोलह सोमवार व्रत उद्यापन

सोलह सोमवार व्रत के समापन पर भगवान शिव का विधिवत पूजन और उद्यापन, पंडित जी के साथ।

सोलह सोमवार व्रत उद्यापन

सोलह सोमवार का व्रत पूरा होने पर उसकी पूर्णता के लिए किया जाने वाला पूजन उद्यापन कहलाता है।
अवधि: डेढ़ घंटे
दक्षिणा / सेवा शुल्क: ₹3,000 से शुरू (पंडित जी सहित)
पूजा सामग्री का खर्च अलग हो सकता है; बुकिंग के समय स्पष्ट बता दिया जाएगा।

यह पूजा क्या है
इसमें भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन कर व्रत का विधिवत समापन किया जाता है।

कब और किसलिए की जाती है
- सोलह सोमवार का व्रत पूर्ण होने पर परंपरा के अनुसार उद्यापन किया जाता है।
- माना जाता है कि उद्यापन से व्रत का संकल्प विधिपूर्वक पूरा होता है।
- कई श्रद्धालु इसे कृतज्ञता के भाव से शिव-पार्वती को धन्यवाद देने के लिए करते हैं।

पूजा की विधि (संक्षेप में)
1. संकल्प और गणपति पूजन।
2. शिव-पार्वती का पूजन और शिवलिंग पर जल-दूध से अभिषेक।
3. व्रत कथा का श्रवण और उद्यापन की विधि।
4. आरती और भोग अर्पण। परंपरा के अनुसार चूरमे का प्रसाद बनता है, जो कुछ घरों में अलग हो सकता है।
5. ब्राह्मण या कन्या भोजन, दान और प्रसाद वितरण।

आम तौर पर लगने वाली सामग्री
- शिवलिंग या शिव-पार्वती का चित्र
- गंगाजल, दूध, दही, शहद
- बेलपत्र, धतूरा
- सफेद फूल
- रोली, मौली, अक्षत
पूरी सामग्री सूची पंडित जी से पूछकर तय की जाएगी।

शुभ तिथि / मुहूर्त
उद्यापन प्रायः सोमवार को किया जाता है; सही तिथि और मुहूर्त पंडित जी के साथ तय किया जाएगा।

बुकिंग कैसे करें
1. "फॉर्म भरें" पर अपनी पूजा, तिथि और स्थान बताएँ, या WhatsApp पर संपर्क करें।
2. हमारी टीम पंडित जी, समय और दक्षिणा की जानकारी देगी।
3. पुष्टि के बाद आपकी बुकिंग पक्की होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्र: क्या उद्यापन घर पर हो सकता है?
उ: हाँ, घर के पूजा स्थान या स्वच्छ कमरे में उद्यापन आसानी से किया जा सकता है।

प्र: क्या यह पूजा सोमवार को ही करनी होती है?
उ: परंपरा में सोमवार को प्राथमिकता दी जाती है।

संपर्क: WhatsApp +91 8932026569 | info@yogsanskriti.co.in

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